टॉप 10 टारगेट Quotes हिंदी मे


दोस्तो इस संसार मे हर आदमी के जीवन मे कोई ना कोई लक्ष्य जरूर होता है क्योंकि ईश्वर ने हमे धरती पर कोई ना कोई लक्ष्य देकर भेजा है। लक्ष्य प्राप्ति के लिए हममे निश्चय, लगन, मेहनत, उत्साह, आत्मविश्वाश होना आवश्यक है। कई बार अगर हम असफल हो जाते है, तो हम नकारात्मक सोचने लग जाते है। उस समय हमे जरूरत होती है अपने मन तथा मस्तिष्क को motivate करने की। जिसके लिए या तो हम किसी अच्छी किताब का सहारा लेते है या internet पर कोई अच्छा article, stories and quotes ढुंढते है। तो दोस्तो यहाँ मै कुछ target quotes publish कर रहा हूँ। तो चलिए अब quotes पढते है…………

  1. लक्ष्य प्राप्ति के लिये सहज प्रवतियों को होम कर देना ही अच्छा है | ~ सम्पूर्णानन्द
  2. सब मनुष्यों के कर्मों का लक्ष्य उन्नति कि चरम सीमा को प्राप्त करना है | ~ सत्य साईं बाबा
  3. अपने लक्ष्यों को पूरा होते देखने का सिद्धान्त जीवन के सभी क्षेत्रों में काम करता है |
  4. जब भी लक्ष्य तय करो, उसके लिए जुनूनी बनना होगा| नाकामियों का आप पर नकारात्मक असर नहीं होना चाहिए | लक्ष्य को हासिल करने में कितना भी समय लग रहा है, उससे विचलित होने की जरुरत नहीं है |
  5. सार्थकता हासिल करने के लिए स्पष्ट तस्वीर बिल्कुल अनिवार्य है |
  6. जहां संकल्प बड़ा होता हैं, वहां विपदा और संकट बड़े नहीं हो सकते | ~ मैकियावेली
  7. लक्ष्य जितना बड़ा होता है, उसका रास्ता भी उतना ही लंबा और बीहड़ होता है | ~ साने गुरूजी
  8. सबकी सुनने और मानने वाला किसी नतीजे पर नहीं पहुंचता |
  9. अपने जीवन का कोई लक्ष्य बनाइये, क्योंकि लक्ष्यविहीन जीवन बिना पतवार की नाव के समान इधर-उधर भटकता रहता है |
  10. हमारा जीवन पक्षी है, केवल थोड़ी ही दूर तक उड़ सकता है, इसने पंख फैला दिए है, देखो, जल्दी से इसकी दिशा सोच लो |

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आखिर क्यों हम अक्सर बड़े लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते?

दोस्तो हम सफलता प्राप्तकरने के लिए हमेशा ही सीधा और छोटा रास्ता चाहते है लेकिन सफलता कभी एकमुश्त नहीं मिलती क्योंकि इसका रास्ता लम्बा और कठिन है। यह तो पड़ाव दर पड़ाव पार किया जाने वाला एक ऐसा सफर है जिसमे हमे दिन रात पूरी लगन से मेहनत करनी पडती है। अक्सर ऐसा होता है कि हम छोटे छोटे पड़ावों पर ही जीत के उत्सव में डूब जाते हैं, और अपने लक्ष्य को भूल जाते है। दोस्तो छोटी-छोटी कामयाबियों का जश्न मनाना तो जरूरी है लेकिन इसके उत्साह में असली लक्ष्य को ना भूला जाए। अक्सर लोग यहीं मात खा जाते हैं।

हमें अपना लक्ष्य तय करते समय ही यह भी तय कर लेना चाहिए कि हमारा मूल उद्देश्य क्या है और इसमें कितने पड़ाव आएंगे। अगर हम किसी छोटी सी सफलता या असफलता में उलझकर रह गए तो फिर बड़े लक्ष्य तक जाना कठिन हो जाएगा।

दोस्तो उदाहरण के लिए महाभारत का युद्ध, जो कौरवो तथा पांडवो के मध्यहुआ था, में चलते हैं। कौरव और पांडव दोनों सेनाओं के व्यवहार में अंतर देखिए। कौरवों के नायक यानी दुर्योधन, दु:शासन, कर्ण जैसे योद्धा और पांडव सेना से डेढ़ गुनी सेना होने के बाद भी वे हार गए। धर्म-अधर्म तो एक बड़ा कारण दोनों सेनाओं के बीच था ही लेकिन उससे भी बड़ा कारण था दोनों के बीच लक्ष्य को लेकर अंतर। कौरव सिर्फ पांडवों को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से लड़ रहे थे।

जब भी पांडव सेना से कोई योद्धा मारा जाता, कौरव उत्सव का माहौल बना देते, जिसमें कई गलतियां उनसे होती थीं। अभिमन्यु को मारकर तो कौरवों के सारे योद्धाओं ने उसके शव के इर्दगिर्द ही उत्सव मनाना शुरू कर दिया।

वहीं पांडवों ने कौरव सेना के बड़े योद्धाओं को मारकर कभी उत्सव नहीं मनाया। वे उसे युद्ध जीत का सिर्फ एक पड़ाव मानते रहे। भीष्म, द्रौण, कर्ण, शाल्व, दु:शासन और शकुनी जैसे योद्धाओं को मारकर भी पांडवों के शिविर में कभी उत्सव नहीं मना।

उनका लक्ष्य युद्ध जीतना था, उन्होंने उसी पर अपना ध्यान टिकाए रखा। कभी भी क्षणिक सफलता के बहाव में खुद को बहने नहीं दिया।

तो दोस्तो हमे अपनी मंजिल के हर पडाव को जीत कर उत्साह तो जरूर मनाना चाहिए लेकिन अपना ध्यान लक्ष्य से क्भी नही हटाना चाहिए नही तो एक बार फिर असफल होना पडेगा।

धन्यवाद