सफलता का राज

     दोस्तो बहुत समय पहले की बात है एक रामू नाम का लकडहारा था, जो रोज जंगल से लकडी काटकर लाता और शहर मे बेच देता। एक दिन उसे एक लकडियाँ का व्यापारी मिला और व्यापारी ने रामू को नौकरी पर रख लिया अब रामू जंगल से रोज् लकडी काटकर लाता और सेठ को दे देता, सेठ भी बदले मे रामू को वेतन दे देता। इस प्रकार रामू को सेठ के यहा नौकरी करते हुए 7 साल हो गए। एक दिन सेठ ने एक अन्य लकडहारा, जिसका नाम कालू था, को नौकरी पर रख लिया। कालू रोज रामू से अधिक लकडियाँ काटकर लाता और सेठ को दे देता। कुछ दिन बाद सेठ ने कालू की पगार दोगुनी कर दी। यह देखकर रामू ने सोचा की मै सेठ के पिछले 7 सालो से नौकरी कर रहा हूँ लेकिन सेठ ने एक बार भी मेरी पगार नही बढाई और कालू जिसे आये हुए कुछ ही दिन हुए है उसकी पगार बढा दी। रामू सेठ के पास गया और पुंछा की मै 7 साल से आपके यहा लकडियाँ काट रहा हूँ लेकिन आपने एक बार भी मेरी पगार नही बढाई और कालू को आए हुए कुछ दिन ही हुए है जिसकी पगार दोगुनी कर दी गई। तब सेठ ने कहा कि तुम हमेशा ही निश्चित लकडियाँ काटकर लाते हो तुमने कभी भी अधिक लकडी नही काटी और कालू जो रोज तुमसे अधिक लकडी काटकर लाता है इस्लिए मैने उसकी पगार बढा दी। अगर तुम भी अधिक लकडी काटकर लाओगे तो तुम्हारी पगार भी बढा दुंगा।

यह बात सुनकर रामू कालू के पास गया और उससे पुंछा की रोज अधिक लकडियाँ कैसे काट लेते हो। तब कालू ने जवाब दिया कि मुझे जिस पेड की लकडी अगले दिन काटनी होती है उस पेड को मै पहले दिन ही ढुंढ लेता हूँ, जिससे की अगले दिन पेड ढुंढने में वक्त खराब ना हो। बस इसी वजह से मै अधिक लकडियाँ काट पाता हूँ। फिर क्या था रामू ने कालू की सफलता का राज जान लिया था। फिर रामू भी रोज इसी प्रकार से लकडी काटने लगा और कुछ ही दिनो मे सेठ ने रामू का वेतन भी बढा दिया। अब रामू अपने वेतन से संतुष्ट था और सेठ रामू के काम से।

तो दोस्तो जो काम हमें अगले दिन करना होता है उसकी प्लानिंग पहले दिन ही कर लेनी चहिए ताकि अगले दिन प्लानिंग बनाने मे समय खराब ना हो।

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B.L. SAMOTA

आत्मविश्वास

आत्मविश्वासबहुत समय पहले की बात है। इंग्लैंड के एक शहर मे कौबडेन नामक व्यक्ति विशाल जन समुह के सामने बोलने को प्रस्तुत हुए। लेकिन जैसे ही उन्होने बोलने के लिए माइक हाथ मे लेकर बोलने लगे तो अपने सामने उपस्थित जनसमुह को देखकर उनके मुह सॆ एक शब्द भी नही निकला। बहुत प्रयास किया परंतु जीभ जैसे बीमार हो गई थी और वे कुछ नही बोल पाए। किसी का मजाक उडाना तो मानव की जन्मजात प्रवति है ही। उपस्थित लोगो ने ताने मारना शुरु कर दिया। जब तक वे मंच से उतर कर दूर नही चले गए उनकी हंसी उडाते रहे और तालियां पिटते रहे।
कौबडेन घर चले गये लेकिन वे रातभर सो ना सके। सुबह उठकर अपने आप को आईने के सामने खडा करके जोर जोर से बोलने का अभ्यास किया और यह उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। कुछ ही दिनो के बाद वे अपने मित्रो के साथ् शहर के चौराहो तथा छोटी-छोटी सभाओ मे भाषण देने लग गये। इस प्रकार मंच और भीड़ का भय ज़ल्दी ही दिमाग़ से निकल गया।
अपने इन्ही प्रयास से उन्हें अनेक दृष्टांत कंठस्थ हो गए। और उन्होंने अपने आत्मविश्वास तथा मेहनत से एक दिन अपने देश के सर्वश्रेष्ठ वक्ता का स्थान प्राप्त किया।

कहानी से सीख: लगातार मेहनत और अभ्यास करने से एक न एक दिन सफलता अवश्य मिलेगी।

नोट:

 

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