पढाई करते समय ध्यान देने योग्य 12 बातें

पढाई हमेशा कुर्सीटेबल पर बैठ कर ही करें , बिस्तर पर लेटकर बिलकुल भी न पढ़े। क्योंकि लेटकर पढने से पढ़ा हुआ दिमाग मॆ बिल्कुल भी याद नही रहता, बल्कि नींद आने लगती है ।

पढ़ते समय टेलीविजन न चलाये और रेडियो या गाने भी बंद रखे ।

पढाई के समय मोबाइल स्विच ऑफ़ करदे या साईलेंट मोड में रखे , क्योंकि मोबाइल पढाई का शत्रु है।

पढ़े हुए पाठ्य को लिखते भी जाये इससे आपकी एकाग्रता भी बनी रहेगी और भविष्य के लिए नोट्स भी बन जायेंगे।

कोई भी पाठ्य को कम से कम तीन बार जरुर पढ़े ।

रटने की प्रवृति से बचे , जो भी पढ़े उस पर विचार मंथन जरुर करें।

शॉर्ट नोट्स जरुर बनाये ताकि वे परीक्षा के समय पाठ्यक्रम दोहराने मॆ काम आये।

पढ़े हुए पाठ्य पर अपने मित्रों के साथ विचार विमर्श जरुर करें , क्योंकि ग्रुप डिस्कशन पढाई में लाभदायक होता है।

पुराने प्रश्नपत्रो के आधार पर महत्वपूर्ण टोपिको को छांट ले और उन्हें अच्छे से तैयार करें ।

१० संतुलित भोजन करें क्योंकि ज्यादा भोजन से नींद और आलस्य आता है , जबकि कब भोजन से पढने में मन नही

लगता है, और थकावट, सिरदर्द आदि समस्याएं होती है ।

११चित्रों, मानचित्रों, ग्राफ , रेखाचित्रो आदि की मदद से पढ़े। क्योंकि ये अधिक समय तक याद रहते है ।

१२पढाई में कंप्यूटर या इन्टरनेट की मदद भी ले सकते है ।

नोट:- यदि आपके पास कोई प्रेरक कहानी या लेख हो तो हमॆ ई-मेल कीजिए, पसन्द आई तो हम उसे आपके नाम के साथ प्रकाशित करॆगॆ।

धन्यवाद

बी.एल. सामोता

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6 thoughts on “पढाई करते समय ध्यान देने योग्य 12 बातें

  1. शब्द शब्द का फर्क
    शब्द ही माँ शारदे और शब्द ही संसार।
    शब्द बिन कुछ भी नही,बिन शब्द सुना संसार।।

    शब्द ज्ञान है और शब्द ही अभिमान।
    शब्द हि मान है बिन शब्द जिन्दगी नरक समान।।

    शब्द शमशीर समान है करदे दिल पर घाव।
    शब्द ही दवा समान है भरदे दिल के घाव।।

    शब्द हि तो करते है मुर्दे को जिन्दा समान।
    शब्द हि तो करते है जिन्दा को मरे समान।।

    शब्द शब्द का फर्क है जो जाने वो राम समान ।
    जो ना जाने वो मानव होके भी पशु समान।

    शब्द के ख़ातिर राम गए चौदह बरस बनवास।
    शब्द में वो प्रलय है जो करदे विनाश।।

    शब्द ही आशीष है और शब्द ही तिरस्कार।
    शब्द सिखाने वाले गुरु को मेरा नमस्कार।।
    शब्द की धार तलवार की धार से भी तेज धार है।
    जो शब्द को समझ गया वो मंझधार पार है ।।

    अंतिम दोहा-
    शब्द सिखाने में चला,मुझसा मूढ़ न कोय।
    अंधकार में खो गया’भव अब न पार होय।।
    कवि-राजेंद्र जांगिड़
    भीलवाड़ा राजस्थान
    +919694892718

  2. नमस्कार सर
    मै सर पढाई के साथ pvt. जाँब करता हूँ लेकिन मै gov. job चहाता हूँ मै सर बहुत आलसी किस्म का हो गया हूँ plz सर मै क्या करुँ मुझे guide करिये
    thanks

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